कविता में कहने की आदत नहीं
मगर कह दूँ
वर्तमान समाज चल नहीं सकता
पूँजी से जुड़ा ह्रदय बदल नहीं सकता
...'मुक्तिबोध'
Friday, September 6, 2024
जंजीर
१) ज़ंजीर खोले जाने के बाद भी वे आगे नहीं बढ़े वे इतने सालो में चलना भी भूल गये थे .. २) लोहे की मोटी ज़ंजीर के बदले सोने की पतली ज़ंजीर से बचना उसे तुम तोड़ सकते हो इसे तुम तोड़ना नहीं चाहोगे ...||
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