हमारी मुहिम @तीसरी दुनिया संभव है

कविता में कहने की आदत नहीं मगर कह दूँ वर्तमान समाज चल नहीं सकता पूँजी से जुड़ा ह्रदय बदल नहीं सकता ...'मुक्तिबोध'

Friday, November 11, 2016

kavita : hanumant kishor हनुमंत किशोर

Posted by hanumant at 9:49 AM No comments:
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भागो नहीं दुनिया को बदलो ...

ना अपने आप बदली है
ना अपने आप बदलेगी
ये दुनिया है
दुनिया को बदल डालो
..... फ़िराक



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तीसरी दुनिया यूटोपिया नहीं यथार्थ

"तीसरी दुनिया न तो हवाई है न जादुई वह उतनी ही वास्तविक होगी जितनी पहली और दूसरी दुनिया हैं किन्तु वह इतिहास के विकास क्रम में अपने आप नहीं आयेगी और ना ही सर्वथा निरापद,संघर्ष हीन या शाश्वत होगी |वह वर्तमान का विलोम नहीं पूरक रचेगी | सत्ता के विमर्श का स्थान समानता ,सहयोग और सदभाव का होगा | यूटोपियन दिखती हुई वह यथार्थ होगी |
वह पहली और दूसरी दुनिया की एक सेंथेसिस होगी और हमें ही उसका संवाहक होना होगा "

अब तक देखा गया ...

संगवारी

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